अन्नपूर्णा स्त्रोत |अन्नपूर्णा स्त्रोत के लाभ | annapurna stotram lyrics

आइये एक नवीन विचारों के साथ अन्नपूर्णा स्त्रोत की रचना और प्रस्तूति के विषय मे संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करते हैं ।।

फिर वह अनमोल स्त्रोत जो - धन,धान्य,आनन्द व ऐश्वर्य से जीवन को भरने वाला तथा,रिपु बाधा, हरने वाला,रोग नाश करने वाला स्त्रोत "मां अन्नपूर्णा के स्त्रोत" का पाठ व स्वाध्याय करते हैं।

शंकराचार्य द्वारा देवी भवानी अन्नपूर्णा पूजन एवं स्त्रोत रचना

आदि गुरु शंकराचार्य ने अपनी भक्ति से देवी अन्नपूर्णा को प्रसन्न किया था। एक कथा है, कि जब एक बार शंकराचार्य काशी में पहुंचे तो वहां उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा। वह देह से बहुत ही कमजोर हो गए थे।

     ऎसे में एक दिन देवी अन्नपूर्णा ने एक स्त्री का वेश धारण कर वहां पहुंची और बड़े से मटके को वहां रख कर कुछ देर विश्राम करने के बाद, जब चलने लगती हैं, तो शंकराचार्य से उस मटके को उठाने में सहायता करने का आग्रह करती हैं। तब शंकराचार्य उनसे कहते हैं, कि उनमें बिलकुल भी शक्ति नहीं है, जिस कारण वह उनकी सहायता कर पाएं।
    ऎसे में स्त्री वेष में मौजूद देवी अन्नपूर्णा उन्हें कहती हैं, यदि तुमने शक्ति की उपासना की होती तो तुम को अवश्य ही शक्ति की प्राप्ति होती। यह सुन शंकराचार्य को आत्मबोध होता है। और वह देवी की उपासना करने में मग्न हो जाते हैं।और इसी घटना के बाद रचना हुुई "मां अन्नपूर्णा स्त्रोत" की।
    आदि शंकराचार्य जी के द्वारा अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ किया गया और उन्हें पुन: शक्ति की प्राप्ति हुई।

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ऐंसी है यह अन्नपूर्णा स्त्रोत की महिमा आइये पढ़ते हैं और खुद जीवन के हर प्रकार के शोक को दूर करते हैं।

अन्नपूर्णा स्त्रोत






माँ अन्नपूर्णा स्त्रोत

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी

     निर्धूताऽखिल-घोर-पावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी।

प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी

     भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ १ ॥


नानारत्न-विचित्र- भूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी

     मुक्ताहार-विलम्बमान-विलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी

काश्मीराऽगुरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी 

    भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ २ ॥ 


योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्माऽर्थनिष्ठाकरी

    चन्द्रार्कानलभासमान-लहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी

सर्वैश्वर्यसमस्त-वाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी 

    भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ३ ॥


कैलासचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी

   कौमारी निगमार्थ-गोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी।

मोक्षद्वार-कपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी

   भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ४ ॥


दृश्यादृश्य-प्रभूतवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी        

   लीलानाटक-सूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी। 

श्रीविश्वेशमनः प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ५ ॥


उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी

  वेणी-नील-समान-कुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी। 

सर्वानन्दकरी दशाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ६ ॥


आदिक्षान्त समस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी

   काश्मीरा त्रिजनेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्करा शर्वरी । कामाकांक्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ७॥


देवी सर्वविचित्र-रत्नरचिता दक्षकरे संस्थिता

  वामस्वादुपयोधरी-सहचरी सौभाग्यमाहेश्वरी।

भक्ताभीष्टकरी दशाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥८॥


चन्द्रार्कानल-कोटिकोटि-सदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी        

   चन्द्रार्काग्निसमान-कुन्तलहरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी।

माला-पुस्तक-पाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥६॥


क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी

    साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी- विश्वेश्वरी-श्रीधरी। दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥१०॥ 


अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे!।

    ज्ञान-वैराग्य-सिद्धयर्थं भिक्षां देहि च पार्वति !॥११॥ 

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।

 बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥१२॥ 


॥ श्री अन्नपूर्णास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥



अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का महत्व (Importance of Annapurna Stotra) :-


अन्नपूर्णा स्तोत्रम् (Annapurna Stotram) पाठ के माध्यम से हम माता अन्नपूर्णा की आराधना करतें हैं। माँ अन्नपूर्णा का रहस्य


श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् की रचना यह एक सिद्ध स्तोत्र रचना है।

अन्नपूर्णा माता की कृपा प्राप्ति के लिए भक्तिपूर्वक श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें।


मां अन्न पूर्णा का संक्षिप्त परिचय :-


माता अन्नपूर्णा अन्न की देवी हैं,वे काशी की अधिष्ठात्री देवी है।

काशी प्रदेश बनारस में उनका भव्य मंदिर है। जिसमे माँ अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित है.

माँ अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन आप अन्नकूट त्यौहार के अवसर पर कर सकतें हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ अन्नपूर्णा ने स्वयं महादेव को भोजन करवाया था।


अन्नपूर्णा स्तोत्र के पाठ से लाभ :- 


श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र (Shri Annapurna Stotra) के पाठ से मनुष्य को माँ अन्नपूर्णा की परम कृपा की प्राप्ति होती है.


माँ अन्नपूर्णा अन्न की देवी है.

अन्नपूर्णा माता की कृपा से मनुष्य को कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है।


दुःख और दरिद्रता,शत्रु बाधा माँ अन्नपूर्णा दूर करती है।

साथ जन्मों के पापों का माँ अन्नपूर्णा नाश कर देती है. और अपने भक्त के जीवन में खुशियाँ प्रदान करती है.

अन्न से माँ अपने भक्त का भण्डार भर देती है।

माँ अन्नपूर्णा अपने भक्त की समस्त विपतियों से रक्षा करती है।

अन्नपूर्णा माता अपने भक्त को समस्त सुख प्रदान करती है और मोक्ष भी प्रदान करती है।


अन्नपूर्णा माता से संबंद्धित कुछ अन्य जानकारी :- 


अन्नपूर्णा माता माँ जगदम्बा का ही रूप है. माता काशी में वाश करती हैं. मान्यताओं के अनुसार काशी क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता है.


माता अपने बच्चों पर बहुत ही दयालु हैं।

अपने भक्तों के दुःख और दरिद्रता को माता दूर करती हैं.

अन्नपूर्णा माता तीनों लोकों की माता है.


अन्नपूर्णा माता कहाँ की अधिष्ठात्री देवी हैं?

माँ अन्नपूर्णा काशी जिसे हम सब बनारस भी कहतें हैं की अधिष्ठात्री देवी हैं.


अन्नपूर्णा स्तोत्रम् की रचना किसने की थी?

श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् की रचना आदि शंकराचार्य जी ने की थी।


माँ अन्नपूर्णा को किसका रूप माना जाता है?

माँ अन्नपूर्णा को जगदम्बा माता का ही रूप माना जाता है.


अन्नपूर्णा माता का प्रसिद्द मंदिर कहाँ है?

बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दुरी पर माँ अन्नपूर्णा का मंदिर है।


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