हिन्दी भाषा और उसके शब्दों का जादू(Magic of Hindi language and its words)

 हिन्दी भाषा को सीखने के लाभ (Benefits of learning and speaking Hindi language)

हिन्दी भाषा के रोचक शब्द श्रीमति  का अर्थ क्या होता है यदि नही तो अब जाने-

 "श्री - लक्ष्मी रूपी शक्ति
मति- सरस्वती रूपी शक्ति। "

           आशय यह हुआ कि,जिस जीव में लक्ष्मी और सरस्वती एक साथ निवास करे।हिन्दी भाषा को सीखने के लाभ (Benefits of learning and speaking Hindi language)
          अर्थात भाव यह हुआ कि जिसे यह शब्द बोला जाए ,तो सुनने वाले और बोलने वाले दोनों के मन मे एक बात आदर भाव से मन मे स्थिर हो जाता है,कि वह एक ऐंसे व्यक्ति को संबोधित कर रहा है,या कहें,ऐसा व्यक्ति सम्बोधन सुन रहा है,जिसमें "श्री-लक्ष्मी रूपी शक्ति-धन की शक्ति,मति-सरस्वती रूपी शक्ति-बुद्धि की शक्ति" स्थायी रूप से निवास करती है।
हिन्दी भाषा और उसके शब्दों का जादू(Magic of Hindi language and its words)



हिंदी भाषा का दूसरा रोचक शब्द हैं श्रीमान शब्द के अर्थ को समझते हैं-

"श्री - लक्ष्मी रूपी शक्ति,
मान- जो सम्मान करें ।"
      
आशय यह हुआ कि श्रीमान वही है जो जीव अपनी श्री-लक्ष्मी रूपी शक्ति का सम्मान करे।
हिन्दी भाषा और उसके शब्दों का जादू(Magic of Hindi language and its words)

अब बताइये क्या ये शब्द आपके हमारे लिए उपयोगी नहीं हैं,यदि हैं तो क्यों जीवन के हर क्षण हम अंग्रेजी के ये शब्द ज्यादा उच्चारण में ले रहे हैं-जैसे-
मिस्टर-
मिसिस -
अंकल-
आंटी-
सिस्टर-
ब्रदर-
मेम-
मेडम-
मम्मी-
डेड-इत्यादि इन सभी का सही अर्थ यदि जान लिया जाए तो शायद आप कभी भी इनके उच्चारण की स्थिति में नहीं होंगे,चूंकि ये शब्द मेरे लेख के योग्य कतय नहीं हैं,इस हेतु में आपको यह गृहकार्य देती हूं कि इनके अर्थ किसी ऐंसी डिक्सनरी में देखें जहां बिना सुधार किये इनके अर्थ दिये हों।


लेकिन हिंदी भाषा के ये शब्द
श्रीमान-
श्रीमती-
चाचा-
चाची-
भाई-
बहन-
मामा-
मामी-
माता-
पिता-
ये वे हिन्दी भाषा के शब्द हैं,जिनमे भाव के आत्मिक सम्बन्ध जुड़े होते हैं,ये वे शब्द होते हैं जो अनजाने को भी माननीय बना देते हैं,और स्नेह की,प्रेम की धारा ये स्वतः ही बहाए चले जाते हैं। हिंदी का यह भाव प्रदर्शन का सूक्ष्म ज्ञान है,यह जिसके पास रहता है,वह सुख पूर्वक, विचार पूर्वक आचरण से जीता है और जाने क्या अनजाने भी उसके स्नेह के वशीभूत होकर,उसपे समर्पित हो ही जाते हैं,क्योंकि ये हैं ही अनमोल शब्द।
इसलिए कहते हैं कि हिन्दी की छवि न्यारी है।


अब जाने हिंदी से क्या सम्भव है:-

1) दूसरों को समझाने में आसानी

            कहा जाता है कि व्यक्ति जिस भाषा का ज्ञाता होता है उस भाषा में वह अपने विचारों का आदान-प्रदान आसानी से कर सकता है और सामने वाले पर अपना अच्छा प्रभाव जमा सकता है,ऐसा ही कुछ राधिका के साथ हुआ, जब वह हर क्षेत्र में बहुत तेज थी,सिवा अंग्रेजी बोलने के, जिस कारण उसे खुद पर बहुत झुंझलाहट होती थी।

             एक बार उस के स्कूल में डिबेट कंपीटिशन था । सभी छात्र इंगलिश में स्पीच दे रहे थे। मंच से राधिका नाम पुकारा गया,अब राधिका मंच की तरफ धीरे-धीरे कदम बढ़ाती जा रही थी। अचानक उसका मन किया चाहे जो भी हो अब राधिका हिम्मत नहीं हारेगी।

            मंच को नमन किया और उस पर चढ़ने से पहले ही उस ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि आज वह हिंदी में ही अपना भाषण देगी,भले ही वह जीते या न जीते,और राधिका ने बोलना प्रारम्भ कर दिया,मंच के पास ही,श्रोतागण चुप होकर सुनना  प्रारम्भ कर दिये।

            उस ने शब्दों और भाषा पर अपनी मजबूत पकड़ की वजह से ऐसा भाषण दिया कि सुनने वालों के शरीर के रेंगटे खड़े हो गए । वहां उपस्थित छात्रों के साथ-साथ जूरी मैंबर्स भी खड़े हो कर तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।

हिन्दी के इस सप्ताह में अब हिंदी के दीवानों से परिचित हो जाइए, इन पुरोधाओं ने खुद को हिंदी मय बनाया,और हिंदी को जन जन की भाषा बनाने की प्रेरणा दी । हिन्दी के इन दीवानों को जाने आइए हिंदी को जानिएहिन्दी की दीवानगी को फेलाइये।

            भले ही वहां का माहौल अंग्रेजी का बना हुआ था, लेकिन सिवा राधिका के किसी ने भी विषय की गहराई को समझ उसे आज के संदर्भ से जोड़ने की कोशिश नहीं की थी ,और इसी का नतीजा था, कि वह अव्वल आई।

2)अपनी भाषा में बेहतर रिजल्ट

            आजकल अधिकांशतया देखने में आता है कि छात्र देखा-देखी विषय व भाषा का चयन कर लेते हैं, लेकिन आगे चल कर उस में असफल हो जाते हैं । उन्हें लगता है कि अगर वे अपने मित्र या सम्बन्धियो को यह बताएंगे कि वे हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं तो सब के मन में यही सोच पैदा होगी कि शायद अंग्रेजी भाषा पर पकड़ न होने के कारण हम ने हिंदी माध्यम से पढ़ने का फैसला लिया.      

              सोच कर देखिए तब क्या होगा???? जब देखा-देखी लिया गया निर्णय आप को फेल कर देगा, और वही दोस्त आप को यह बोलने में भी पीछे नहीं रहेंगे कि जब बस का नहीं था तो किस ने कहा था अंगरेज बनने को।  ऐसे में अगर आप अपना बेहतर कैरियर बनाना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि अंगरेजी माध्यम से ही पढ़ाई करें, आप हिंदी माध्यम से भी सफलता हासिल कर सकते हैं।

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3)चहरे के हाव भाव मे भी बेहतर

             अपनी भाषा में बात करने का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि शब्दों के साथ-साथ हमारा चेहरा भी बोलता है , जिससे हमें अपनी योग्यता को साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि अपनी भाषा में बात करते समय चेहरे पर प्राकृतिक भाव आते हैं और हम किसी की भी बात का सहज हो कर उत्तर दे पाते हैं।

             जबकि दूसरी भाषा में प्रभाव जमाने के लिए हम उसे दिल से नहीं बल्कि बोझ समझ कर ग्रहण करते हैं और कई बार इतना अधिक रटने के बावजूद ठीक से हाव-भाव नहीं कर पाते इसलिए बेहतर यही है कि न तो हिंदी को अपनाने में झिझकें और न ही उस में अपने विचार प्रकट करने में शर्म महसूस करें

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4)अधिक रचनात्मक विचार आते हैं

            जिस भाषा पर हमारी अच्छी पकड़ होती है, हमें उस में काम करने में भी बहुत मजा आता है, जिस से हमारा दिमाग ज्यादा रचनात्मक सोचता है । इस से हमें कई तरह की योजनाएं बना कर बेहतर रिजल्ट मिल पाते हैं वरना दूसरी भाषा में काम करते हुए हमें उसे समझने में काफी समय लग जाता है, ऐसे में उस भाषा में रचनात्मक सोचने का तो सवाल ही नहीं उठता । 

श्री मति माधुरी बाजपेयी
मण्डला मध्यप्रदेश भारत

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