भारत पर्यटन Indian Tourism

          भारतीय पर्यटन का जन्म,(Birth of Indian Tourism) 

                       सृष्टि के रचेता ने बड़ी अद्भुत पर्यटन कला बनाई है। सम्पूर्ण जीव मात्र एक पर्यटक के रूप में जन्म लेता हैं, शनेः शनेः अपनी जीवन यात्रा को सम्पूर्ण करने के लिए हर परिस्थियों  का अनुभवः करते हुए,इस धराधाम में विचरण करता  है । स्वयं के अनुरूप समाज मे जीवन जीना प्रारम्भ किया, पूर्ण मनोयोग से आगे बढ़कर,मानव जाति ने संस्कार, संस्कृति,सभ्यता को समझने का भरसक प्रयास किया है। साथ ही,कुशल पर्यटक बनने के लिए अपनी शिक्षा-दीक्षा, योग्यता, प्रतिभा पर कुछ समय व्यतीत करता है। तत पश्चात स्वयं की शिक्षा के अनुरूप धनार्जन के लिए स्थान का,रोजगार का चयन करता है। भारतीय पर्यटन का जन्म,(Birth of Indian Tourism) 

पर्यटन की यात्रा में न जाने से लोगों में उत्पन्न हुई बहुत समस्याएं 


                  सनातन परंपरा में वैदिक काल से ही मनिषियों, चिंतकों ने देखा कि सनातन परंपरा से जुड़ा सम्प्रदाय अपने जीवन की गति को एक ही स्थान पर सीमित करके रूक गया है, जिससे उसके अंदर बहुत सी कमियां जन्म लेती जा रहीं थीं ।

जैसे - 

  1. व्यक्ति के मन मे ताजगी का आभाव,           
  2. चीजों को समझने की परेशानियां,    
  3. नई सोच और नई उमंगों का आभाव,      
  4. परेशानियों का शीघ्रता से निर्णय न ले पाना,
  5. पुराने वातावरण से बदलकर नए वातावरण के अनुकूल न ढल पाना,
  6. शान्ति का आभाव,संकुचित व रूढ़िवादी मानसिकता,
  7. ध्यान की गहराई और शांति की शीतलता का आभाव,इत्यादि।              

                   इन मनिषियों ने,चिन्तकों ने निर्णय लिया कि वे स्थान जहाँ गहनतम ऊर्जा के भंडार स्त्रोत भरे पड़े हैं।

वे स्त्रोत हैं -

  • ऋषियों की तपःस्थली के ।
  • तपस्वियों का समाधी स्थल के।

                   अब इनका वर्णन जन जन तक पहुंचे इस हेतु इन्ही चिन्तकों ने,मनिषियों ने बडी कुशलता से निर्णय किया,जिसमें -

    नित-नवीन दर्शन की परंपरा का निर्माण,

ऊर्जा केंद्रित पीठों का निर्माण व उनका वर्णन गर्न्थो में देना,गर्न्थो में भिन्न-भिन्न,स्थानों का वर्णन और वाचन के साथ-साथ,श्रवण की परंपरा का प्रादुर्भाव किया।

शीतलता से भरे हुए नदियों के स्त्रोतों,एवं सुखद भिन्न-भिन्न जल स्त्रोतों का वर्णन,शांति से भरी गुफाएं,इत्यादि

                      जिससे लोग पर्यटन में रुचि लें इन्ही चिन्तकों ने,मनीषियों ने इन दर्शनीय स्थलों को गहरा अर्थ देने के लिए 'तीर्थ' शब्द का निर्माण किया,और आगे चलकर यह शब्द तीर्थ यात्रा के रूप में बदल कर जन- जन तक पहुंचा।

तीर्थ यात्रा शब्द के पीछे का रहस्य -

                    नए रूप को धारण करने के पीछे,दर्शन,ध्यान की गहराई,आत्म चिंतन,मंथन,और नवीन चित्त की स्थिर स्थितयों का निर्माण,ऊर्जा का सारगर्भित शोधन,भक्ति मय रूप से ऊर्जाओं का किसी के जीवन को नवीन कर देने जैसे चिंतन को शामिल किया गया।

अब तीर्थ शब्द को जाने -

तीर्थ संस्कृत शब्द है और इसका अर्थ है - पार उतारने वाला।

और तीर्थ यात्रा से तात्पर्य, पार उतारने वाली यात्रा से है। 

                    तीर्थ का अभिप्राय है वह स्थान जो सकारात्मक ऊर्जा से ओत प्रोत हो,अर्थात् जो अपने में पुनीत हो और अपने यहाँ आने वाले यात्रियों,दर्शनार्थियों में पवित्रता का संचार कर सके।

भारत में राष्ट्रीय पर्यटन दिवस(National Tourism Day)

                   वैसे तो भारतीय पर्यटन दिवस भारत के इतिहास का एक गौरवशाली दिवस है | भारत देश मे अलग-अलग सम्प्रदाय के लोग हैं इसके बाद भी एकता भारत देश की खूबी है | अनेकों विविधताएं लिए भारत भूमि अपने सुंदरतम पर्यटन स्थलों के कारण समूचे विश्व में अपना विशेष स्थान लिए हुये है। भारत सरकार (Government of India) द्वारा पर्यटन दिवस मनाने की शुरुआत लोगों को पर्यटन के महत्व और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका के बारे में जागरूक करने के लिये की गयी। 

हर साल 25 जनवरी को भारतीय राष्ट्रीय पर्यटन दिवस(National Tourism Day ) मनाया जाता है।

भारत के पर्यटन विभाग के एक अभियान ने देश,विदेश के Tourist शैलानियों को आकर्षित किया

                     भारतीय पर्यटन विभाग ने सितंबर 2002 में ‘अतुल्य भारत’ नाम से एक नया अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य भारतीय पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रस्तूत करना था,जो काफी हद तक सफल हुआ। इसी तरह राजस्थान पर्यटन विकास निगम ने रेलगाड़ी की शाही सवारी कराने के माध्यम से लोगों को पर्यटन का लुत्फ उठाने का मौका दिया। जिसे 'पैलेस ऑन व्हील्स' नाम दिया गया। राजस्थान पर्यटन विकास निगम की यह पहल दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर भारत का नाम रोशन करने वाला माना गया है।

पर्यटकों Tourist का रखा विशेष ध्यान

                     भारत की पर्यटन क्षमता को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने वाला यह अपने किस्म का यह पहला प्रयास था। पर्यटन के क्षेत्र में विकास इसके पहले राज्य सरकारों के अधीन हुआ करता था। राज्यों में समन्वय के स्तर पर भी बहुत थोड़े प्रयास दिखते थे। भारत के द्वार विदेशी सैलानियों के लिए खोलने का काम यदि सही और सटीक विपणन ने किया तो हवाई अड्डों से पर्यटन स्थलों के सीधे जुड़ाव ने पर्यटन के क्षेत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत मे पर्यटन की आसानी

                   आज Tourist  सैलानी पर्यटन के लिहाज से सुदूर स्थलों की सैर भी आसानी से कर सकते हैं। निजी क्षेत्रों की विमान कंपनियों को देश में उड़ान भरने की आज्ञा ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सिमटती दूरियों के बीच लोग बाहरी दुनिया के बारे में भी जानने के उत्सुक रहते हैं। यही कारण है कि आज दुनिया में Tourism एक फलता फूलता Industry उद्दोग बन चुका है। 

पर्यटन से भारत पर प्रभाव :-

                  पर्यटन से पडने वाले भारत पर सकारात्मक प्रभाव भी बहुत हैं - पर्यटन के चलते भारत की आर्थिक व्यवस्था पर भी बहुत सकारात्मक प्रभाव हुआ है | विश्व भर के लोग भारत के दर्शनीय स्थलों को देखने हर वर्ष यहाँ आते हैं, और इससे हमारा आर्थिक स्तर भी बहुत बढ़ा है | भारतीय संस्कृति और सभ्यता को दर्शाते ये रमणीय स्थल सिर्फ विदेशी मेहमानों को ही नहीं, वरन समस्त भारतवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहे हैं और हमेशा रहेंगे |

पर्यटन से कुछ लोगों की आजीविका चलती है -

                    आंकड़ों के अनुसार भारत के पर्यटन उद्योग से लगभग 7.7 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका चला रहे हैं | प्रतिवर्ष लगभग 7.5 मिलियन विदेशी भारत दर्शन को आते हैं |पर्यटन के क्षेत्र में लगातार हो रही प्रगति के कारण आर्थिक सुधार और रोज़गार के क्षेत्र में विकास हुआ है |

विश्व पर्यटन दिवस (world tourism day 2020)

                       सम्पूर्ण विश्व के किसी भी देश की सांस्कृतिक विरासत को भी पर्यटन से बढ़ावा मिलता है। विश्व पर्यटन दिवस उन लोगों के लिए बहुत खास होता है, जो लोग पर्यटन से जुड़े हुए हैं। 

जिज्ञासा ही पर्यटन को बढाबा देती है  :-

                     हर मनुष्य के जीवन में पर्यटन के प्रति आकर्षण स्वाभाविक रूप से होता है। नई जगहों को देखना और उसके बारे में जानने की जिज्ञासा ही पर्यटन को बढ़ावा देती है। हाल ही के दिनों में पर्यटन एक उद्योग Tourism industry के रूप में स्थापित हुआ है। एक दूसरे की संस्कृति को जानना, समझना और देखना Tourism को और समृद्ध बनाता है।

                      विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत सन् 1970 में विश्व पर्यटन संस्था के द्वारा की गई थी। सन् 1980 में 27 सितंबर को पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया। इसकी शुरुआत वर्ष 1980 में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन के द्वारा हुई,इस तिथि के चुनाव का मुख्य कारण यह था कि वर्ष 1970 में UNWTO ने कानून को स्वीकारा था।

                       अधिकतया पर्यटन का मुख्य उद्देश्य रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना है। विश्व पर्यटन दिवस (world tourism day 2020) लोगों में पर्यटन के प्रति जागरूकता लाने और अधिक से अधिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। 

श्री मति माधुरी बाजपेयी
मण्डला,मध्यप्रदेश,भारत


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