अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस | international women's day speech in hindi

International women day :-   वैदिक काल से ही भारतीय मानस में स्त्रियों की छवि हमेशा से ही सौम्यता,और शांतिप्रियता से भरी पड़ी है,लेकिन अब स्थितियां ऐंसी हो गई हैं, कि  स्त्री को भी सृजन के मार्गों पर जाना पड़ेगा। उसे भी निर्माण की दिशाएं निरन्तर खोजनी पड़ेंगी। जीवन को ज्यादा सुंदर और सुखद बनाने के लिए उसे भी प्रेम से भरा अनुदान करना पड़ेगा,तभी स्त्री का मान, स्त्री का सम्मान, उसकी प्रतिष्ठा है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस | international women's day speech in hindi


     महिला दिवस पर ध्यान दें कि स्त्री को एक और तरह की ‍'शिक्षा' चाहिए, जो उसे संगीत से भरा व्यक्तित्व दे, जो उसे नृत्य से भरा हुआ व्यक्तित्व दे, जो उसे प्रतीक्षा की अनंत क्षमता दे, जो उसे मौन की, चुप होने की, अनाक्रामक होने की, प्रेमी की तरह और करुणा की गहरी शिक्षा दे। तभी तो यह सारी शिक्षा अनिवार्य रूपेण 'ध्यान' में बदल ही जाएगी।

महिलाओं का सहन शक्ति से भरा व्यक्तित्व है

   क्या आप जानते हैं स्त्रियों की सहनशक्ति पुरुषों से कई गुनी ज्यादा है। पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर है, बहुत हास्यास्पद है कि पुरुष एक ही शक्ति का हिसाब लगाते रहते हैं, वह है भुजाओं की। क्योंकि वह बड़ा पत्थर उठा लेता है, इसलिए वह सोचता रहता है कि मैं शक्तिशाली हूं, लेकिन बड़ा पत्थर अकेला आयाम अगर शक्ति का होता तो ठी‍क है,महिलाओं की सहनशीलता भी बहुत बड़ी शक्ति है- जीवन के दुखों को झेल जाना,उनकी यह अद्भुत कला है।

महिला दिवस के इस अवसर पर एक सर्वे के अनुसार

     बालिकायें पहले बोलना शुरू करती हैं। बुद्धिमत्ता बालिकाएं में पहले प्रकट होती है,बालिकाएं ज्यादा तेज होती हैं, विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा में बालिकाएं आगे होती हैं।

नारी अपनी माधुर्यता खोते जा रही है।

     ध्यान दीजियेगा जो भी नारी आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है। अगर कोई स्‍‍त्री आपके पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो 100 में से 97 प्रतिशत आप  घबरा जाओगे आप भागोगे।           

     क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है,अब वह पुरुष होने की दौड़ में स्त्रैण नहीं रही। स्त्री का स्त्रैण होना, उसका माधुर्य इसी में है कि वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है।लेकिन प्रतीक्षा उसके अन्तस् को मजबूत करती है।

स्त्रियों में बांधने की कला है??

    अब एक भावार्थ से बात स्पष्ट हो जाएगी बात यह है कि एक स्त्रेण चित्त से भरी स्त्री की बात की जाए तो वह स्त्री को उकसाती है, लेकिन आक्रमण नहीं करती। वह तो बुलाती है, लेकिन चिल्लाती नहीं। उसका बुलाना भी बड़ा प्रिय मौन है। इतना ही नही आपको सब तरफ से घेर लेती, लेकिन शायद आपको  पता भी नहीं चलता होगा कि उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं। वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से आपको सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता।

इस अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस में स्त्रियाँ चाहें तो सम्पूर्ण विश्व में युद्ध समाप्त हो जाये:-

    अगर सारी दुनिया की स्त्रियां एक बार तय कर लें- युद्ध नहीं होगा। तो आपको क्या लगता है- दुनिया पर कोई राजनैतिक युद्ध में कभी किसी को नही घसीट सकता,सिर्फ स्त्रियां तय कर लें। युद्ध अभी नहीं होगा- तो नहीं हो सकता,क्योंकि कौन जाएगा युद्ध पर? कोई बेटा जाता है,कोई पति जाता है, कोई बाप जाता है। अन्तोगत्वा स्त्रियां एक बार तय कर लें।

       लेकिन स्त्रियां को न जाने क्या हुआ हैं?? अत्यंत गहरे भृम जाल में हैं। युद्ध होता है तो टीका करती हैं कि जाओ युद्ध पर। पाकिस्तानी मां, पाकिस्तानी बेटे के माथे पर टीका करती है कि जाओ युद्ध पर। हिन्दुस्तानी मां, हिन्दुस्तानी बेटे के माथे पर टीका करती है कि जाओ बेटे,युद्ध पर जाओ।

      पता चलता है कि स्त्री को कुछ पता नहीं कि यह क्या हो रहा है?? वह पुरुष के पूरे जाल में सिर्फ एक खिलौना बन हर जगह एक खिलौना बन जाती है। चाहे पाकिस्तानी बेटा मरता हो, चाहे हिन्दुस्तानी,किसी मां का बेटा मरता है। यह स्त्री को समझना होगा। रूस का पति मरता हो चाहे अमेरिका का। स्त्री को समझना होगा, उसका पति मरता है। अगर सारी दुनिया की सभी स्त्रियों को एक विचार पैदा हो जाए कि आज हमें अपने पति को, बेटे को, अपने बाप को युद्ध पर नहीं भेजना है, तो फिर पुरुष की लाख कोशिश पर राजनैतिकों की हर कोशिशें व्यर्थ हो सकती हैं, युद्ध नहीं हो सकता है।

International women day में  जाने स्त्री बड़ी शक्ति है :-

   यह स्त्री के स्वयं जे अंदर इतनी बड़ी शक्ति है, वह उसके ऊपर सोचती है कभी? उसने कभी कोई आवाज नहीं की। उसने कभी कोई चिंता नहीं की। उस आदमी ने- पुरुष ने- जो रेखाएं खींची हैं राष्ट्रों की, उनको वह मान लेती है। प्रेम कोई रेखाएं नहीं मान सकता। हिंसा रेखाएं मानती है, क्योंकि जहां प्रेम है, वहां सीमा नहीं होती। सारी दुनिया की स्‍ित्रयों को एक तो बुनियादी यह खयाल जाग जाना चाहिए कि हम एक नई संस्कृति को, एक नए समाज को, एक नई सभ्यता को जन्म दे सकती हैं। जो पुरुष का आधार है उसके ठीक विपरीत आधार रखकर,यह स्त्री कर सकती है। 

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